जायदाद के बाद समोसा ही वो चीज़ है जो बंटवारे के बाद भी कम लगता है है

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अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो, डीजल नब्बे पेट्रोल सौ, सौ में लगा धागा, सिलेंडर उछलकर भागा।

चलो मान लिया, पेट्रोल-डीजल के भाव इसलिए बढ़ रहे हैं, क्योंकि जंग की वजह से रूस से निर्यात होने वाली तेल सप्लाई में रुकावट आ गई है। लेकिन क्या नींबू यूक्रेन से आते हैं जो दस रुपए का एक कर दिया? कल अपनी मैडम से शिकंजी बनाने को कहा तो उनके माथे पे ‘शिकन’ आ गई।

दोस्तो, अब सुनो पते की बात। जायदाद के बाद समोसा ही वो चीज है, जो बराबर बंटवारे के बाद भी सामने वाले को कम ही लगता है। और भैया समोसा तो वही अच्छा लगता है कि खोलो तो भाप निकले। अंदर छोटे-छोटे मसालेदार चटकदार गरम आलू हों। मगर उसको खाने में जरा-सी भी जल्दबाजी की तो तालू और जबान जल जाती है। हमारे देसी समोसे का कोई मुकाबला नहीं है। और जो ये आजकल चले हैं चाउमीन, बर्गर, नूडल्स, पिज्जा अरे इनकी औकात नहीं है हमारे समोसे का मुकाबला कर पाए।

दोस्तो, समोसे का ताल्लुक भूख से नहीं है। न गरीबी या अमीरी से है। बस सामने दिख जाए तो खाओ समोसा। भूख हो चाहे न हो। चाहे आप जस्ट खाना खा के आ रहे हो तो भी एक समोसा तो चल ही जाता है। मुझे तो समोसा इतना पसंद कि बचपन में हमको जैसे ही पता चलता था कि मोहल्ले में किसी के घर लड़के वाले लड़की देखने

देसी समोसे का कोई मुकाबला नहीं है। और जो ये आजकल चले हैं चाउमीन, बर्गर, पिज़्ज़ा। अरे इनकी औकात नहीं है हमारे समोसे के सामने टिक भी पाए ।

राजू श्रीवास्तव कॉमेडियन

आ रहे हैं या रिश्तेदार आए हैं, तो हम खुद वहां पहुंच जाते थे कि अब इनके यहां समोसे तो आएंगे ही आएंगे, बल्कि हम खुद जाकर पूछ लेते थे कि न’चाची, समोसे मंगाना है क्या?” फिर भाग के उनके लिए गरम-गरम समोसे लाते थे, इस चक्कर में कि एक समोसा हमको भी तो मिलेगा ही मिलेगा।

T भिया ये समोसे के चक्कर में बहुत लभेड़ भी हुई है। एक बार हुआ यूं कि परमपुरवा वाले गुप्ताजी की लड़की को लड़के वाले देखने आए थे। नाश्ता वाश्ता रखा गया। अचानक लड़के वाले खड़े होकर चल दिए। उनसे पूछा गया कि क्या हुआ जी? तो वे लोग बोले कि जब तुम लोग ढंग का समोसा र नहीं खिला पाए तो रिश्तेदारी क्या खाक निभाओगे ? आप लोगों ने ये छोटा वाला इलाहाबादी सूखा ।

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समोसा रखा हम लोगों के आगे। आप लोगों ने ये सूखा समोसा रखकर हमारी बेईज्जती की है। कल को हम अपने रिश्तेदारों के साथ अपने लड़के की ■ बरात लेकर आपके यहां आएंगे तो हमारी तो इज्जत का बैंड बज जाएगा।

सही बता रहे हैं भिया। ये छोटे वाले सूखे ■ इलाहाबादी समोसे के चक्कर में बहुत से रिश्ते टूट गए। एक बात और बताएं। एक झूठ जो सदियों से ■ चला आ रहा है। जब कभी भी वाले लड़की ■ को देखने आते हैं तो वहां लड़की की अम्मा लड़के वालों से कहती हैं, ‘ये लीजिए। ये समोसे खाइए। ये हमारी बिटिया सुनीता ने अपने हाथों से बनाए

हैं। देखो अब शर्मा रही है। लीजिए, लीजिए!’ जबकि यह बात तो वो लड़के वाले भी जानते हैं कि ये समोसे नुक्कड़ वाले हलवाई के वहां से नहीं है मंगाए गए हैं। इन लोगों ने सिर्फ उन समोसों को ए प्लेट में रखकर हमारे सामने रख दिए हैं, बस खुद वहां तो आएंगे नते थे कि के उनके अरे, बड़ी-बड़ी रिश्तेदारी बना देता है समोसा। ऐसे ही एक बार हमारी इंदौर वाली बुआ के यहां लड़के वाले लड़की देखने आए थे और भिया उन लोगो को समोसे इतने अच्छे लगे कि तुरंत शादी पक्की हो गई। बताओ एक समोसे पर रिश्ता तय हो गया। है।

और भिया कभी-कभी जान जलकर रह जाती एक बार हम कार से जा रहे थे तो चौराहे पर लभेड़ भी सिग्नल रेड हो गया तो ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। ने गुप्ताजी तभी मेरी नजर वहीं नुक्कड़ की हलवाई की दुकान नाश्ता- पर पड़ी। मैंने देखा वहां हलवाई के यहां गरम-गरम खड़े होकर समोसे छन रहे हैं।

मैंने सोचा कि दौड़ के दो जी? तो चार समोसे लपक लिए जाएं। मगर हमारी गाड़ी के का समोसा आगे छकड़ा था। बायीं तरफ टेम्पो और दायीं तरफ नभाओगे? लोडर निकलने की जगह नहीं थी। मैंने ड्राइवर से बादी सूखा कहा कि रुको, हम समोसे ले आएं। तो वो बोला, लोगों ने ये साहब आप निकल नहीं पाएंगे। अब में बेचैनी में है।

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कल बाहर निकलने की कोशिश कर ही रहा थे कि तभी लड़के की सिग्नल ग्रीन हो गया और हमारी गाड़ी के पीछे तो इज्जत वाले सब हॉर्न बजाने लगे। में एकदम मजबूर और असहाय निगाहों से हलवाई के समोसों को देख रहा वाले सूखे था। तभी मेरी नजर साइड में पड़ी। एक रिक्शेवाला रिश्ते टूट पैर पर पैर चढ़ाए, हरे पत्तल में समोसे लिए खा रहा सदियों से था। उसके समोसे से भाप निकलती देखकर मेरा

ले लड़की कलेजा जल गया। कसम से मन तड़प के रह गया। मा लड़के लास्ट में बस एक ही बात कहूंगा कि मेरी बातें से खाइए। ध्यान से सुना करो, क्योंकि मेरे घर में मेरी कोई से बनाए सुनता नहीं है।

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