कैसे जानें बच्चा हाइपरएक्टिव है

1
91

ह म सभी को हंसते-खेलते, उछलते-कूदते बच्चे अच्छे लगते vec r 1 लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब हमें कैसे मदद vec dPr एडीएचडी से पता चले कि बच्चों का उछलना-कूदना बालसुलभ चंचलता की वजह से नहीं है, बल्कि वेक्ट है। पर केंद्र नहीं कर पाते की भाषा में इसे एडीएचडी कहा गया है। लड़ रहे बच्चों की…

क्या है यह एडीएचडी ?

बाल मनोचिकित्सक डॉ. नम्रता सिंह बताती हैं कि किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाने वाले अतिसक्रिय बच्चे अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) से पीड़ित हो सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं चीजों पर ध्यान न दे पाना अतिसक्रियता और उतावलापन। नजरें नहीं मिलाना, एक ही शब्द को बार-बार दोहराना, एक जगह सीधे नहीं बैठना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। 7 से 9 साल के बच्चों में एडीएचडी के लक्षण pi*c = नजर आने लगते हैं और यदि छोटी उम्र में ही इसकी पहचान हो जाए तो उपचार आसान हो जाता है। यदि आपके बच्चे में नीचे दिए हुए लक्षण में से पांच से छह लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है।

• बच्चा कक्षा में डिटेल्स पर ध्यान नहीं दे पाता। स्कूली पढ़ाई में छोटी- मोटी गलतियां करता है। • • खेलकूद में पीछे रहता है, क्योंकि उसे खेल के नियम •ठीक से समझ नहीं आते। • जब कुछ बताया जा रहा होता है, तो उसका ध्यान कहीं और रहता है।

Also Read: जायदाद के बाद समोसा ही वो चीज़ है जो बंटवारे के बाद भी कम लगता है है

एकाग्रता भंग हो जाती है। • रोजाना की गतिविधियों को भूल जाता है।
• बहुत जल्दी और आसानी से उसकी
• किसी भी काम को, खासकर दिमागी काम को करने में मुश्किल होती है। में = sqrt 4b overline v जगह बैठ नहीं पाता, खाना खाते समय भी हिलता-डुलता रहता है। एक जगह से दूसरी जगह दौड़ता-भागता रहता है, चीजों से टकराते रहता है।

एडीएचडी के दुष्परिणाम…

एडीएचडी का पहला प्रभाव स्कूली पढ़ाई पर पड़ता है, क्योंकि स्कूल में एकाग्रता जरूरी है। यहां सबक को याद रखना होता है, व्यवस्थित रखना होता है। वे अक्सर होमवर्क नहीं करते या उसमें गलतियां करते हैं। नोट्स लेने में उनसे गलतियां हो जाती हैं। वे सवालों के जवाब 7 hat 161 दे पाते। आमतौर पर यह देखा जाता है कि एडीएचडी वाले बच्चों को सोशलाइजेशन में समस्या नहीं होती। ये दूसरे बच्चों से आसानी से दोस्ती कर लेते हैं, पर अपने अधीर और अस्थिर स्वभाव vec 9 चलते दोस्ती निभाना उनके लिए थोड़ा कठिन होता है।

एडीएचडी होने पर जिंदगी को आसान बनाने के लिए कई थैरेपीज उपलब्ध हैं। काउंसलर तथा डॉक्टर के निर्देश पर इन्हें अपनाया जाना चाहिए।

खानपान पर खास ध्यान vec 2 : फास्ट-फूड और प्रोसेस्ड फूड का लंबे समय तक सेवन करने से एडीएचडी की समस्या बढ़ती है। आपको अपने बच्चे के खानपान पर खास ध्यान देना होगा। यह सुनिश्चित करें कि वे सेहतमंद चीजें ही खाएं। पैकेन्ड फूड से बचिए

प्रतिक्रिया संभलकर करें: आपको बच्चे की हरकतों पर प्रतिक्रिया देने से बचना होगा। गुस्सा बिल्कुल न करें। बच्चे को शांत रखने के लिए पहले खुद शांत रहना सीखना होगा।

Also Read: Reliance Jio brings back Rs 499 prepaid plan, extends Happy New Year offer

व्यायाम के लिए प्रेरित करें: हाइपरएक्टिव बच्चों में बहुत ज्यादा ऊर्जा होती है, उनकी ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए एक्सरसाइड बेहतर है। आप भी बच्चे के साथ एक्सरसाइज करें। इससे बच्चे की हाइपरएक्टिविटी कम होगी और आपका तनाव भी। आप बच्चे को ज्यादा शारीरिक ऊर्जा की जरूरत वाले किसी खेल से भी जोड़ सकते हैं।

प्रकृति से जोड़ें: प्रकृति का सानिध्य हदपरएक्टिव बच्चे को भी नई ताजगी और शांति से भर देगा उसके मनोभावों को सुनें। उसकी भावनाओं को महसूस करें।

बिहेवियर थैरेपी और ट्रेनिंग: हाइपरएक्टिव बच्चों को ट्रेनर बिहेवियर थैरेपी देते हैं, इसमें उन्हें कुछ बेहद जरूरी सोशल स्किल्स सिखाते हैं, जैसे अपनी बारी का इंतजार करना, दूसरों के चेहरों के हाव-भाव पड़ना चीजें साझा करना मदद मांगना भावनाओं पर काबू करना आदि। – इनपुट डॉ नितिन वर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here