बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

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जनहित याचिका • देश में करीब 3 करोड बच्चे अनाथ, नियमों में ढील दें कड़े कानून के चलते लोग बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में जटिलता बच्चा गोद नहीं ले पाते, इसमें ढील देने की मांग

3 करोड़ अनाथ बच्चों में सिर्फ 4 हजार लिए जाते हैं गोद’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र (Central Government) को नोटिस जारी करते हैं जवाब चाहते हैं कि क्या कहना है। Adoption Regulations 2017 in Hindi. अर्जी में कहा गया है कि जो डाटा उपलब्ध है उसके तहत सिर्फ चार हजार बच्चों का एडॉप्शन हो पाता है। कई दंपत्ति ऐसे हैं जो बच्चे को गोद लेना चाहते हैं।

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

बच्चा गोद लेने में कागजी कार्रवाई इतनी ज्यादा है कि लोग पूरी नहीं कर पाते हैं

देश में ज्यादातर लोग बच्चा गोद लेने के इच्छुक होते हुए भी उसे पूरा नहीं कर पाते। कारण- इसमें इतनी ज्यादा कागजी कार्रवाई होती है कि लोग इसे पूरी नहीं कर पाते। अनाथ बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया और उसकी अड़चनों के बारे में बता रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता। Intra family Adoption in India in Hindi

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देश में अनाथ बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। CARA In Hindi जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है। एनजीओ ‘टॅपल आफ हीलिंग’ की ओर से दायर जनहित याचिका में वकील पीयूष सक्सेना ने दलील दी कि वर्तमान कानून के तहत बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। देश में इस समय 3 करोड़ के करीब अनाथ बच्चे हैं

। इतने ही निसंतान दंपती हैं जो बच्चों को गोद लेना चाहते हैं। लेकिन, कड़े कानून के चलते वे में ऐसा नहीं कर पाते। कानून में ढील “देना चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि नियम संभवतः इसलिए कड़े हैं कि बच्चों को अनाश्यक शोषण से बचाया जा सके। बच्चे के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं। अगर नियमों में ढील दी जाएगी तो इससे बच्चों को नुकसान हो सकता है। इस पर वकील पीयूष सक्सेना ने कहा कि कुछ मामलों में गोद लेने वाले दंपती गलत हो सकते हैं,

लेकिन इस आधार पर सभी को शक की निगाह से देखना भी सही नहीं हो सकता। कोर्ट को उन बेऔलाद दंपतियों के दर्द को समझना चाहिए जो बच्चा गोद लेकर अपनी खुशियां पूरी करना चाहते हैं, Adoption deed format in Hindi pdf. मगर कानूनी जटिलताओं के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। कानूनों को सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया जाना चाहिए।

भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है? कहां और किसके समक्ष आवेदन करना होता है?

भारत में बच्चों को गोद लेने के लिए केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा) का गठन किया है। New born Baby Adoption Center Near me. इसके माध्यम से अनाथ और बेसहारा बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिए जाने का कार्य किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश में अनाथ बच्चों सहित गोद लेने वालों की संख्या ...
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश में अनाथ बच्चों सहित गोद लेने वालों की संख्या …

बच्चा गोद लेने के लिए कारा के नोडल अधिकारी के पास आवेदन देना होता है।

इच्छुक दंपती को कई तरह की कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। Adopt a baby boy for free. ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि अनाथ बच्चों को यौन शोषण, मानव तस्करी या भीख मंगवाने जैसे अपराधों से बचाया जा सके।

• बच्चा गोद लेने के लिए इच्छुक दंपती को किस तरह के दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं?

अनाथ बच्चे को गोद लेने वाले दंपती को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक स्थिति को दर्शाने वाले तमाम दस्तावेज कारा के नोडल अधिकारी के समक्ष दायर करने होते हैं। CARA Adoption contact number. इसके अतिरिक्त अगर इच्छुक दंपती को किसी प्रकार की जानलेवा बीमारी है तो उसका रिकार्ड भी देना होता है।

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इसके अलावा इच्छुक दंपती को परिवार की तस्वीर, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आयकर रिटर्न की कॉपी, सरकारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी हेल्थ सर्टिफिकेट, शादी का प्रमाण पत्र, अगर गोद लेने वाला सिंगल पैरंट है तो तलाक का विवरण और उससे जुड़े दो लोगों के बयान दिए जाते हैं। परिवार में पहले से बच्चे हैं। तो नए बच्चे को गोद लेने के लिए जैविक बच्चों की सहमति भी जरूरी है। यह कागजी कार्रवाई बहुत ज्यादा होती है। ”

गोद लेने के लिए कानूनी जटिलताएं क्या हैं?

कारा द्वारा बच्चा गोद लेने की जो प्रक्रिया तय की गई है, उसमें सबसे बड़ी जटिलता यह है कि कागजी कार्रवाई बहुत ज्यादा है। हमारे देश में अभी भी बहुत से लोग अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे लोग हैं। ऐसे लोग उन सभी कागजी कार्रवाई को पूरा नहीं कर पाते हैं। •• क्या केंद्र सरकार ने कभी इन जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया है? www.cara.nic.in hindi. साल 2015 में प्रक्रिया को आसान करने का प्रयास केंद्र सरकार ने किया था। मगर अभी भी प्रक्रिया जटिल ही है।

• बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को आसान व सुरक्षित किस प्रकार बनाया जा सकता है?

सबसे पहले अनाथ बच्चों का डेटाबेस के आधार पर एक एप बनाया जाना चाहिए। वहीं, कम से कम व जरूरी कागजी कार्रवाई ही होनी चाहिए। Child adoption from hospitals in India. आज देश के ज्यादातर लोगों की विभिन्न जानकारी आधार कार्ड से जुड़ी है। ऐसे में विभिन्न दस्तावेज न मांगकर आधार कार्ड लेना उचित है। इससे सरकार खुद व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का पता लगा सकती है।

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वहीं, सामाजिक व मानसिक स्तर का पता लगाने के लिए भी आसान उपाए सरकार को अपनाने चाहिए। केवल एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को किसी के चरित्र का पैमाना नहीं माना जा सकता। Adoption in Hindi www.cara.nic.in registration. सरकार को मानवीय आधार पर उपाय करने व जटिलताओं को दूर करने की जरूरत है।

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