क्या विचारों को कंट्रोल किया जा सकता है जाने इसके बारे में…

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Control your mind thoughts
Control your mind thoughts

हममें से ज्यादातर लोगों ने कहीं ना कहीं सुना होगा की विचारों को कंट्रोल भी किया जा सकता है क्या सच में ऐसा हो सकता है आइए हम इसे समझते हैं।

विचार क्या है

जब हम बच्चे थे तो तब हमारे दिमाग में कोई विचार नहीं होते थे क्योंकि उस समय हमने भाषा नहीं सीखी थी इसीलिए जैसे जैसे हम बड़े होते गए हमने भाषा सीखने शुरू कर दी जो भाषा हमने सीखी वही विचार बन गए और विचार मेमोरी में फीड हो गए। हम जितनी ज्यादा इंफॉर्मेशन जानकारी इकट्ठा करते जाएंगे उतने ही ज्यादा हमारे दिमाग में विचार घूमते रहेंगे।

क्या विचारों को कंट्रोल किया जा सकता है?

हम विचारों को कंट्रोल नहीं कर सकते पर हम यह समझ सकते हैं कि विचार क्या है और वह हमारे मन में कैसे आते हैं और उनकी वजह से क्या होता है जो भी विचार हमारे मन में आते हैं वह सब मेमोरी से आते है जो कि हमने बचपन से अभी तक सीखी है वही हमारे दिमाग में रिकॉर्डेड है और वही से विचार उत्पन्न होते हैं।

विचारों को समझने के लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा की मन में विचार चल रहे हैं

कुछ देर के लिए मौन बैठना

अगर आप कुछ देर के लिए बिना कुछ करे यूं ही बैठना सीख लेते हैं तो आप देखेंगे जैसे जैसे शरीर स्थिर होता जाता है वैसे वैसे विचारों की गति भी धीमी होती जाती है। हम विचारों को देख सकते हैं कि विचार कैसे आते हैं उसकी वजह से हमारे मन में क्या होता है, कैसी फीलिंग होती है और कैसे हम उन विचारों में फंस जाते हैं यह सब समझने के लिए खुद के साथ समय बिताना होगा अकेले में, भीड़ भाड़ में हम नहीं समझ सकते।

जब हम खुद के साथ समय बिताते हैं तब हमें समझ आता है कि हमारी क्या कमजोरी है, हमारी ताकत क्या है हमें खुद के बारे में काफी चीजें समझ आती है।

विचारों का हमारे जीवन में क्या रोल हैं

अगर आप ध्यान से देखें तो जब हमें कोई काम करना होता है कहीं जाना होता है तब विचारों की जरूरत होती है बिना विचारों के हम कुछ भी नहीं कर सकते, पर जब हम अकेले होते हैं अकेले बैठे होते हैं, जब हमारे पास कुछ करने को नहीं होता है तब भी मन में अनगिनत विचार घूमते रहते हैं इस स्थिति को पागलपन कहते हैं।

विचारों की जड़ क्या है

विचारों की मूलभूत जड़ है कि हमने खुद को यह शरीर और मन मान लिया है हम जितनी ज्यादा इस शरीर और मन से पहचान बनायेंगे उतने ही ज्यादा विचार हम पर हावी होंगे।

जागरूकता ही एक मात्र साधन है विचारों से दूरी बनाने का।

जब हम अपने विचारों के प्रति जागरूक हो जाते हैं तब हम देखेंगे कि विचार कम होने लगेंगे हैं और हम पहले से ज्यादा खुश और आनंदित महसूस करने लगेंगे हैं, क्योंकि जब हम विचारों में फंसे होते हैं, तो हमें पता ही नहीं होता है कि हमारे साथ क्या हो रहा है विचार हमें इस तरीके से फंसा लेते हैं कि हमें विचारों की दुनिया के अलावा और कोई दुनिया नजर नहीं आती।

जब हम किसी से बात कर रहे होते हैं तब भी हमारे दिमाग में विचार चल रहे होते हैं और हम अपने विचार में ही उलझे रहते हैं और सामने वाले की बात को हम सुन ही नहीं पाते हैं क्योंकि हमें लगता है जो हमारे दिमाग में चल रहा है वह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

जागरूकता ही एकमात्र साधन है जिससे हम विचारों से आजाद हो सकते हैं बस जागरूक रहें की अपने भीतर क्या हो रहा है, जागरूकता ही आजादी है।

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