बुद्ध पूर्णिमा क्या है जाने बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है,

इस साल बुद्धपूर्णिमा 16 मई 2022 सोमवार को आ रही है आप सब ने बुद्ध पूर्णिमा के बारे में सुना होगा कि इस दिन भगवान बुद्ध को आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई थी। आइए इस बारे में हम और गहराई से समझते हैं।

बुद्धपूर्णिमा भगवान बुद्ध के आत्मज्ञान के रूप में देखी जाती है, तकरीबन 8 वर्षों की लगातार कठिन साधना करने के बाद उनका शरीर कमजोर सा हो गया था। फिर उन्होंने 8 साल की कठिन साधना के बाद 4 साल तक समाना की साधना की। समाना साधना में मुख्य रूप से भोजन की तलाश नहीं की जाती है बस चलते रहना होता है और उपवास करना होता है इस साधना ने उनको इतना कमजोर बना दिया था कि वह मृत्यु के बिंदु तक पहुंच गए थे।

फिर वह चलते-चलते निरंजना नदी के पास पहुंचे जो आज भारत में कई अन्य नदियों की तरह सूख कर गायब हो गई है उस समय निरंजना नदी बड़ी धारा थी जिसमें घुटनों तक ऊंचा पानी तेजी से बह रहा था फिर गौतम बुद्ध उस नदी को पार करने की कोशिश कर रहे थे और बीच रास्ते में ही रुक गए क्योंकि उनका शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि वे एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकते थे पर वह हार मानने को तैयार नहीं थे वह बीच नदी में एक सूखी लकड़ी को पकड़ कर खड़े रहे।

कहा जाता है कि गौतम बीच नदी में लकड़ी के सहारे कई घंटों तक खड़े रहे थे कोई भी यह नहीं जानता कि वह कितने घंटे खड़े रहे थे। कमजोरी की स्थिति में एक एक क्षण घंटों की तरह लगते हैं, लेकिन उन्हें उस समय ऐसा एहसास हुआ कि वह जो खोज रहे हैं वह उनके भीतर ही है तो फिर इतना संघर्ष क्यों? केवल पूरी भागीदारी की आवश्यकता है, तो मैं इस दुनिया भर में क्यों भटक रहा हूं।

जब उन्हें यह एहसास हुआ तब उनमें नदी को पार करने की ताकत आ गई और उन्होंने नदी पार की , नदी के सामने उन्हें वृक्ष दिखाई दिया जिसे आज हम बोधि वृक्ष के नाम से जानते हैं। वे उस वृक्ष के नीचे जाकर बैठ गए और खुद से एक प्रण लिया कि मैं यहां से ही हिलूंगा नहीं जब तक कि मुझे आत्मज्ञान प्राप्त ना हो जाए या फिर मेरी इसी स्थिति में मृत्यु हो जाए और उसी पल उनको आत्मज्ञान प्राप्त हो गया।

बस इतना ही समय लगता है आत्मज्ञान होने में अगर हम इच्छुक हैं तो यह एक पल में हो सकता है नहीं तो कभी नहीं।

तो बस वह एक पल था और उस दिन रात को पूर्णिमा का चांद निकल रहा था और वह पूरी तरह से प्रबुद्ध हो गए वह कुछ घंटों तक वहीं पर बैठे रहे और फिर उठ गए। उनकी कई वर्षों की साधना की तीव्रता को देखकर पांच सहयात्री उनके चारों और जमा हो गए थे जो उनकी ओर देख रहे थे जब गौतम बुद्ध को आत्मज्ञान हुआ।

जब गौतम बुध उठे थे बोधि वृक्ष के पेड़ के नीचे से तब उन्होंने सबसे पहली बात जो कही थी कि चलो भोजन करते हैं यह बात सुनकर उनके पांच सहयात्री पूरी तरह से निराश महसूस कर रहे थे क्योंकि उनको लगाता गौतम बुध तो कभी भी खाने की बात ही नहीं करते हैं वह तो उपवास करने की बात करते हैं। तब गौतम बुद्ध ने कहा यह उपवास के बारे में नहीं है अब पूर्णिमा का उदय मेरे भीतर हो गया है मुझे देखो। मुझ में हुए बदलाव को देखो। और आप सब यहीं रहो पर वह सब चले गए।

फिर गौतम बुध अपनी करुणा के चलते कुछ वर्षों के बाद एक-एक करके पांचों लोगों की तलाश में निकले और उन्हें ज्ञान मार्ग पर ले गए।

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद इस पोस्ट को पढ़ने के लिए।

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